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Explained: Why Jofra Archer isn’t in England’s Test squad

Varun Joshi · · 1 min read

इंग्लैंड की टेस्ट टीम से जोफ्रा आर्चर की गैरमौजूदगी: एक विश्लेषण

लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर पांच महीने के लंबे अंतराल के बाद इंग्लैंड की टीम जब न्यूजीलैंड के खिलाफ अपना पहला टेस्ट खेलने उतरेगी, तो फैंस एक बड़े नाम को मिस करेंगे: जोफ्रा आर्चर। हालांकि आर्चर के पास इंग्लैंड का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट है, फिर भी उन्हें ‘अनुपलब्ध’ घोषित किया गया है। इंग्लैंड के मैनेजिंग डायरेक्टर रॉब की ने स्पष्ट किया है कि टीम का मुख्य ध्यान उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट के लिए धीरे-धीरे तैयार करना है।

आर्चर क्यों हैं ‘अनुपलब्ध’?

आर्चर के मामले को समझने के लिए पिछले कुछ महीनों के उनके व्यस्त शेड्यूल को देखना जरूरी है। पिछले साल भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में वापसी करने के बाद, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में एशेज सीरीज खेली, जिसके बाद उन्हें साइड स्ट्रेन की समस्या हुई। इसके बाद वे टी20 वर्ल्ड कप के लिए श्रीलंका और भारत गए और फिर आईपीएल में व्यस्त हो गए। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने 25 विकेट लिए, लेकिन दिसंबर के एशेज टेस्ट के बाद से उन्होंने एक भी मैच में चार ओवर से ज्यादा गेंदबाजी नहीं की है। यही वर्कलोड मैनेजमेंट का मुद्दा उनकी अनुपलब्धता का मुख्य कारण है।

क्या इंग्लैंड उन्हें आईपीएल में खेलने से रोक सकता था?

सैद्धांतिक रूप से यह संभव था, लेकिन ऐसा करने से इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) अपने स्टार खिलाड़ी को हमेशा के लिए खोने का जोखिम उठाता। बीसीसीआई और ईसीबी के बीच हुए समझौतों के तहत, खिलाड़ियों को आईपीएल के लिए एनओसी (NOC) देना अनिवार्य हो गया है। साथ ही, बीसीसीआई के नए नियमों के अनुसार, यदि कोई खिलाड़ी मेगा ऑक्शन में नाम नहीं देता है या अनुबंध से पीछे हटता है, तो उसे भविष्य के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है। आर्चर के मामले में भी काफी मशक्कत के बाद उन्हें आईपीएल में खेलने का मौका मिला था।

वर्कलोड मैनेजमेंट की चुनौतियां

राजस्थान रॉयल्स के कोच कुमार संगकारा का मानना है कि आईपीएल के दौरान वर्कलोड बढ़ाना बेहद मुश्किल था। उन्होंने कहा, ‘जब आप एक मैच में केवल चार ओवर गेंदबाजी कर रहे होते हैं, तो टेस्ट क्रिकेट के लिए अपनी गेंदबाजी क्षमता को अचानक बढ़ाना चुनौतीपूर्ण होता है।’ ईसीबी ने इस स्थिति को समझते हुए उन्हें आईपीएल में रहने की अनुमति दी, ताकि वे वहां से लौटने के बाद अपने वर्कलोड पर काम कर सकें।

टीम मैनेजमेंट और बेन स्टोक्स का नज़रिया

रॉब की ने इसे ‘आधुनिक क्रिकेट की सच्चाई’ बताया है। आज के दौर में राष्ट्रीय बोर्डों को आईपीएल फ्रेंचाइजी के साथ तालमेल बिठाना पड़ता है। वहीं, कप्तान बेन स्टोक्स ने इस स्थिति पर संतुलित राय रखते हुए कहा, ‘मैं लोगों की निराशा समझ सकता हूं, लेकिन एक दूसरा पक्ष भी है। यदि हम इसे सही ढंग से नहीं संभालते, तो जोफ्रा जैसे खिलाड़ी इंग्लैंड के लिए फिर कभी नहीं खेल पाएंगे, जो किसी के लिए भी अच्छा नहीं है।’

विशेषज्ञों की राय और विवाद

इस मामले ने इंग्लैंड में काफी विवाद पैदा किया है। मार्क बुचर जैसे पूर्व दिग्गजों ने इसे ‘बेतुका’ करार दिया है, जबकि माइकल एथरटन का मानना है कि ईसीबी ने अपने खिलाड़ियों पर से अपना नियंत्रण खो दिया है। उनका तर्क है कि दो महीने के आईपीएल विंडो के दौरान बोर्ड को अधिक सतर्क रहना चाहिए था।

आगे की राह: क्या वे दूसरे टेस्ट में वापसी करेंगे?

कोच ब्रेंडन मैकुलम ने स्पष्ट किया है कि आर्चर के लिए एक विशेष प्लान तैयार किया गया है। फिलहाल, वे अपनी फिटनेस पर काम कर रहे हैं। दूसरे टेस्ट में उनकी भागीदारी को लेकर कोई गारंटी नहीं है, लेकिन तीसरे टेस्ट के लिए उन पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा, जुलाई में भारत के खिलाफ होने वाली व्हाइट-बॉल सीरीज और ‘द हंड्रेड’ टूर्नामेंट भी उनके शेड्यूल का हिस्सा हैं, जिसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट सीरीज भी इंग्लैंड को खेलनी है। यह साफ है कि जोफ्रा आर्चर का भविष्य इंग्लैंड के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन उनकी फिटनेस और कार्यभार का प्रबंधन ही आने वाले समय में उनकी टेस्ट क्रिकेट में निरंतरता तय करेगा।

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