‘High-quality’ Saleem limits damage despite extreme heat and unhelpful pitch
चंडीगढ़ टेस्ट: मोहम्मद सलीम का करिश्माई प्रदर्शन
न्यू चंडीगढ़ में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में अफगान तेज गेंदबाज मोहम्मद सलीम ने अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया है। बेहद कठिन परिस्थितियों, भीषण गर्मी और गेंदबाजों के लिए बिल्कुल भी मददगार न रहने वाली पिच पर सलीम ने 140 रन देकर 6 विकेट चटकाए। उनका यह प्रदर्शन न केवल व्यक्तिगत रूप से शानदार है, बल्कि टीम के मनोबल के लिए भी महत्वपूर्ण रहा है।
सलीम की मेहनत और भारतीय बल्लेबाजी
सलीम ने पूरे मैच के दौरान 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी की। उन्होंने यशस्व Jaiswal और बी साई सुदर्शन को शनिवार को आउट करने के बाद, शुभमन गिल को 126 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन भेजा। इसके अलावा उन्होंने ध्रुव जुरेल, मानव सुथार और मोहम्मद सिराज को भी अपना शिकार बनाया। भारत ने अंततः अपनी पहली पारी 564/8 के स्कोर पर घोषित की।
कोच और खिलाड़ियों की प्रशंसा
अफगानिस्तान के मुख्य कोच रिचर्ड पाइबस ने सलीम की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘वह वाकई शानदार थे। अगर आप इतनी भीषण गर्मी में उच्च गुणवत्ता वाली बल्लेबाजी के खिलाफ छह विकेट लेते हैं, तो यह न केवल आपके लिए बल्कि पूरी टीम के लिए बहुत अच्छा है। उन्होंने सिर्फ अपनी लाइन और लेंथ पर ध्यान दिया।’
भारतीय ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर ने भी सलीम के कौशल की सराहना की। सुंदर ने कहा, ‘यह ईमानदारी से ‘हाई-क्वालिटी’ गेंदबाजी थी। पिच में तेज गेंदबाजों के लिए कुछ खास नहीं था, लेकिन लगातार सही सीम पर गेंद डालना बहुत बड़े कौशल और दृष्टिकोण की बात है। उन्होंने लंबे स्पेल फेंके, जो उनके जुझारूपन को दर्शाता है।’
अफगानिस्तान के लिए खराब निर्णय और DRS की चूक
मैच का दूसरा पहलू निराशाजनक रहा। अफगानिस्तान ने DRS का उपयोग करने में अत्यधिक हिचकिचाहट दिखाई, जिसका उन्हें भारी खामियाजा भुगतना पड़ा। चौथे ओवर में, अज़मतुल्लाह उमरजई की गेंद पर शुभमन गिल और ऋषभ पंत के खिलाफ करीबी फैसले अंपायर शरफुद्दौला ने नकार दिए थे। यदि अफगानिस्तान ने रिव्यू लिया होता, तो परिणाम कुछ और हो सकते थे। इसके अलावा, शनिवार को केएल राहुल का कैच आउट न होना और उस पर रिव्यू न लेना भी टीम के लिए महंगा साबित हुआ, क्योंकि राहुल ने बाद में शतक जड़ दिया।
टीम का अनुभवहीन होना
कोच पाइबस ने स्वीकार किया कि टीम मैदान पर काफी ‘जंग लगी’ (rusty) नजर आई। उन्होंने कहा, ‘निर्णय लेने में आत्मविश्वास की कमी थी। कप्तान को बहुत कम समय में फैसला लेना होता है और इसके लिए उन्हें विकेटकीपर और गेंदबाजों से तालमेल की जरूरत होती है। हम इस पर चर्चा कर रहे हैं क्योंकि इस कमी ने हमें काफी पीछे धकेल दिया है। अफगानिस्तान की बल्लेबाजी लड़खड़ा रही है और दूसरे दिन के अंत तक टीम 113 रन पर 5 विकेट गंवाकर भारत से 451 रन पीछे है। अब देखना यह है कि क्या अफगान बल्लेबाज आने वाले दिनों में भारतीय गेंदबाजों का सामना कर पाएंगे या नहीं।’
निष्कर्ष
मोहम्मद सलीम की मेहनत निस्संदेह सराहनीय है। एक ऐसे गेंदबाज के लिए जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपनी टीम के लिए लड़ा, यह अनुभव उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। हालांकि, अफगानिस्तान को मैच में बने रहने के लिए अपनी रणनीति और DRS उपयोग की क्षमता में सुधार करना होगा। क्रिकेट के खेल में तकनीक और सही समय पर लिया गया निर्णय ही जीत और हार के बीच का अंतर तय करता है। आने वाले दिनों में टीम का प्रदर्शन देखने लायक होगा।